Friday, February 4, 2022

क्यों...!

मायूस हो, क्यों हो?
जरा बताओ न!
हसी कहां है तुम्हारी?
जरा लाओ न!
वो कहते है, तुम मुस्कुराते नहीं
फिर भी थोड़ा दिखाओ न!


और तुम रुके क्यों हो?
अभी तो तुम्हे और चलना है
दूर तक जाना है
डरते क्यों हो?
सब्र तो करो
क्या पता आस्मा घुटने टेक दे!
निकाल लो,मेरे सिने से आग
भर लो अपने में,
पर जलाओगे न!!

@rahul_anchor


Thursday, January 6, 2022

देख रहा हूं।।

 मैं उसकी राह देख रहा हूं
मैं सब कुछ देख रहा हूं !
वह सूरज, वो रात की चांदनी
ठंडी हवाएं, सर्दी की धूप
सब कुछ हर वक्त , हर पल
मुझे एहसास था
उसकी आवाजों का,
जो मेरे कानों में फिर से गूंजने वाली थी
मुझे मालूम था,
उसकी बेचैनियों भरी रातों का इलाज
उसकी मुकम्मल जिंदगी में मेरा स्थान
उसकी खुशियों का जिक्र करना
और फिर मायूसी की चादर ओढ़ लेना
सब फिर से मन में ही दुहरा रहा हूं
मैं उसकी राह देख रहा हूं
मैं सब कुछ देख रहा हूं।।
शायद इसी ख्वाब में बैठा हूं
कहीं दोबारा मुलाकात तो होगी
जब प्रश्न मेरे भी होंगे
प्रश्न उनके भी होंगे,
इन सवालों के घरों में
हम फिर से बिछड़ जाएंगे ,
फिर से वही रात वही सब कुछ
फिर से कल्पनाओं की घेरों में
उसकी काली बिंदी का जिक्र करना
उसकी झुमकों का तारीफ करना
उसकी आंखों को निहारना
उसकी हंसी को हसीन बताना
उसको रुला कर फिर हंसाना,
उसकी हाथों का पोहा खाना
घर में छुप कर बातें करना
उसकी फिक्र करना ।
सब मन में ही दुहरा रहा हूं ,
मैं उसकी राह देख रहा हूं
मैं सब कुछ देख रहा हूं।।

@rahul_anchor

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क्यों...!

मायूस हो, क्यों हो? जरा बताओ न! हसी कहां है तुम्हारी? जरा लाओ न! वो कहते है, तुम मुस्कुराते नहीं फिर भी थोड़ा दिखाओ न! और तुम रुके क्यों हो?...